Sunday, 18 June 2017

एक कविता - पिता के नाम !



पापा मतलब सादगी
पापा मतलब हिम्मत
पापा मतलब धैर्य
पापा मतलब संयम
पापा मतलब मुस्कराहट
पापा मतलब भय
पापा मतलब त्याग
पापा मतलब स्थितप्रज्ञ !!

इन पंक्तियों में मेरे पिता का पूरा व्यक्तित्व छिपा है. संभवतः उन्हें समझने के लिए एक बार पुनः मेरी उन स्मृतियों में झांकना होगा, जो हमेशा ही कठिन से कठिन परिस्थियों में मेरा वैचारिक और भावनात्मक संबल बना रहा.

मेरे लिए पापा का मतलब वो पुत्र,
जिसके सामने मानसिक असंतुलन के शिकार पिता का पुत्र हो जाना.
ऑफिस से लौटकर, जूता और खाने का डिब्बा यथास्थान रख;
सबसे पहले पिता का हाल पूछना. फिर,
पुत्र हुए पिता का,
मासूमियत से दिनभर की शिकायतों और इच्छाओं का पुलिंदा खोलना.
पापा का शांतचित हो सुनना, उचित आश्वासन दे संतुष्ट करना.
कभी-कभी असंतुलन की अवस्था में स्व-मल द्वारा गन्दा किये दीवार को अपने हाथों साफ़ करना.
यह जानते हुए कि कुछ हासिल नहीं,
उन्हें कभी पुचकार कर तो कभी झूठा गुस्सा दिखा समझाना.

पापा का मतलब वो पिता,
जिसके लिए एक तरफ दरवाज़े पर बेटी की बारात और दूसरी तरफ
जीवन-मृत्यु के बीच झूलता दुर्घटनाग्रस्त छोटा ‘सौतेला’ भाई.
घर में बेटी की शादी-कन्यादान और अस्पताल में
न्यूरोसर्जन द्वारा किया जा रहा १४ घंटे लम्बा ऑपरेशन.
इधर शादी संपन्न उधर ऑपरेशन.
कुछ घरातियों को छोड़ सारे बाराती और मेहमानों की अनभिज्ञता.
कुछ न कुछ तो थोड़ा-थोड़ा...... ‘लड़केवालों का हठ तो शगुन’
पिता का शांतचित सब संभालना...
बेटी किंकर्तव्यविमूढ़... पिता स्थितप्रज्ञ !!

ऐसी कई और अनमोल स्मृतियाँ हैं पापा की जिसने एक पिता को, पिता की ऊंचाई से कहीं ऊँचा रखा है.

लव यू पापा.

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