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Tuesday, 1 November 2016

अतिक्रमण



लघुकथा 




एक ईंट भट्ठे में काम करने वाले मजदूर का १२ साल का बेटा, भट्ठे मालिक के १५ साल के बेटे से उलझ गया, जब उसने देखा काम जल्दी न करने के लिए उसके बाप को भद्दी गालियाँ दे रहा था. इधर एक मेहनतकश का स्वाभिमान जागा और उधर सत्ता के अस्तिव पर सवाल.
मालिक का बेटा थोड़ी देर में लौटा और.... ठांय ! मजदूर का १२ साला लड़का वहीँ ढेर |
मजदूर भागा-दौड़ा थाने गया ...हुजुर-हुजुर न्याय... न्याय कीजिये |
छलनी कलेजे से सारा हाल बयान किया |
इंस्पेक्टर ने हवलदार को आवाज़ लगाया... ठूंसो साले को अन्दर |
अपने मूंछो ताव देते हुए... ऊ तो सही टाइम पे नज़र पड़ गयी साले पर नहीं तो थाने में आग लगाने ही वाला था.
बेहयाई से हँसता हुआ हवलदार बोला.... सही कहें जनाब ! चलिए साम के चाय का बंदोबस्त हो गया |