लक्ष्मण-रेखा शक्ति या वर्जना का प्रतीकात्मक संधान।
आज नारी अपनी किसी भी अवस्था में, शिशु, बालिका, किशोरी, युवती या फिर वृद्धा ही, सुरक्षित नहीं और न ही किसी स्थान पर चाहे वह सड़क हो, बस, ऑफिस या सार्वजनिक स्थल ही क्यों न हो। कभी-कभी तो अपने घरों में भी सुरक्षित नहीं। ऐसे में 'घर में अकेले बानी, ईश्वर जी राख पानी'.... भिखारी ठाकुर के एक गीत 'करिके गवनवा भवनवा में छोड़ी कर..' से इस पंक्ति को पढ़ यही लगता है कि नारी मन में अकेले होने पर रावण का भय हमेशा से ही रहा है। तत्समय और कालानुरूप कुछ सीमाओं एवं उपायों को तय कर सुरक्षा की व्यवस्था की गई। कालक्रम के साथ ऐसे भय और उसका स्वरूप बदलता गया। ऐसे में ये सीमाएं, वर्जनाओं एवं रूढ़ियों में बदलती गयी।
सीता हरण और लक्ष्मण रेखा के संबंध में भी एक ख्याल मन में आता है वो ऐसी कौन सी रेखा बनाई होगी लक्ष्मण ने जिसे रावण पार करता तो भस्म हो जाता और सीता सहज पार कर भिक्षा दे आती हैं। जहां तक पढ़ा है ऐसी कोई शक्ति या दैवीय सिद्धि का जिक्र कहीं नहीं मिलता है जो लक्ष्मण के पास हो जिसका प्रयोग कर, दैवीय सिद्धि से वह रेखा बनाई हो। हां, बला-अतिबला नाम की शक्ति/शिक्षा महर्षि विश्वामित्र ने राम लक्ष्मण दोनों को ही दी, जिससे ताड़का वन में वे स्वयं की रक्षा ताड़का से अपने बचाव के लिए कर सकें। क्योंकि जंगल में कब और कहाँ उसका हमला हो जाय, कहना कठिन था। लेकिन विश्वामित्र को उसकी प्रकृति और तरीके का पता रहा होगा। और वो शक्ति कोई खास युद्ध तकनीक रही होगी। खैर, तो फिर से बात वहां आ ठहरती है कि क्या सच में लक्ष्मण के पास ऐसी कोई शक्ति थी या फिर हम जिस लक्ष्मण-रेखा को पढ़ते सुनते आ रहे हैं वह मात्र किसी वर्जना का प्रतीकात्मक संधान है !?!?!
आज नारी अपनी किसी भी अवस्था में, शिशु, बालिका, किशोरी, युवती या फिर वृद्धा ही, सुरक्षित नहीं और न ही किसी स्थान पर चाहे वह सड़क हो, बस, ऑफिस या सार्वजनिक स्थल ही क्यों न हो। कभी-कभी तो अपने घरों में भी सुरक्षित नहीं। ऐसे में 'घर में अकेले बानी, ईश्वर जी राख पानी'.... भिखारी ठाकुर के एक गीत 'करिके गवनवा भवनवा में छोड़ी कर..' से इस पंक्ति को पढ़ यही लगता है कि नारी मन में अकेले होने पर रावण का भय हमेशा से ही रहा है। तत्समय और कालानुरूप कुछ सीमाओं एवं उपायों को तय कर सुरक्षा की व्यवस्था की गई। कालक्रम के साथ ऐसे भय और उसका स्वरूप बदलता गया। ऐसे में ये सीमाएं, वर्जनाओं एवं रूढ़ियों में बदलती गयी।
सीता हरण और लक्ष्मण रेखा के संबंध में भी एक ख्याल मन में आता है वो ऐसी कौन सी रेखा बनाई होगी लक्ष्मण ने जिसे रावण पार करता तो भस्म हो जाता और सीता सहज पार कर भिक्षा दे आती हैं। जहां तक पढ़ा है ऐसी कोई शक्ति या दैवीय सिद्धि का जिक्र कहीं नहीं मिलता है जो लक्ष्मण के पास हो जिसका प्रयोग कर, दैवीय सिद्धि से वह रेखा बनाई हो। हां, बला-अतिबला नाम की शक्ति/शिक्षा महर्षि विश्वामित्र ने राम लक्ष्मण दोनों को ही दी, जिससे ताड़का वन में वे स्वयं की रक्षा ताड़का से अपने बचाव के लिए कर सकें। क्योंकि जंगल में कब और कहाँ उसका हमला हो जाय, कहना कठिन था। लेकिन विश्वामित्र को उसकी प्रकृति और तरीके का पता रहा होगा। और वो शक्ति कोई खास युद्ध तकनीक रही होगी। खैर, तो फिर से बात वहां आ ठहरती है कि क्या सच में लक्ष्मण के पास ऐसी कोई शक्ति थी या फिर हम जिस लक्ष्मण-रेखा को पढ़ते सुनते आ रहे हैं वह मात्र किसी वर्जना का प्रतीकात्मक संधान है !?!?!
--सुमन उपाध्याय
